दुनिया से हारे हैं आतंक के सहारे हैं, सबने ठुकराया है इतने बेचारे हैं , फिर भी बाज नहीं आते ऐसे बेकारे हैं , गरीबी में डूबे नागरिक सारे के सारे हैं, एक पैसे की बुद्धि नही सभी आवारे हैं, भीखमंगा देश का ताना दुनिया मारे हैं, भारत के टुकड़े टुकड़े करेंगे ऐसे इशारे हैं, हमारे साथ ही लगाए आजादी के नारे हैं, भले ही गद्दार निकले पर खून तो हमारे ही हैं, हम फिर भी सुधरने का मौका देते हैं, इंसानियत के ऐसे प्यारे हैं।

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